है इशारों से बुना हुआ
है ज़िन्दगी से भरा हुआ
ऐ मेरे इश्वर , ऐ मेरे अल्लाह
क्या तुम्हे न दिखा वोह?
रुका हुआ , खड़ा हुआ .
यह है क्या पर एक पथिक ,पसीने से सना हुआ
हिम्मत का तहखाना इसके दिल में अभी भी खुला हुआ.
यह है खड़ा तेरे दर पर झोली फैलाये
क्या न दिखा तुझ इसके माथे पर वह
शब्द खुदा हुआ ?
वह शब्द जो तेरी नहीं बल्कि इस अभागे की लेन है
वह नाम जो इसकी पहचान पर एक व्यंग है
विश्वास करो मेरा
यह भटका हुआ पथिक अब और कहीं नहीं जाएगा
पर अगर तुने भी ना सुना
तो तेरे ही दर पर अपनी जान दे जाएगा
शायद इसके अपवित्र खून से तेरा दर लाल हो जाएगा
पर कम से कम इस अभागे को मरने का
एक मकाम ही सही मिल जाएगा .
इसकी मौत उतनी सस्ती नहीं
जितनी इसकी जान है,
पर जान देकर भी कौन सा यह संसार
बदल जाएगा?
है शीण हो चूका इसका उत्साह
है मर चुकी इसकी आत्मा
शायद इसी तरह इसका भी
उद्धार हो जाएगा.
इस पथिक की क्या गलती?
इसने तो रास्ता है काटा
पर तेरी भी क्या गलती
जो तुने एक वही रास्ता ही दिखाया..?
चल रहा है दर बदर खून से लथपथ
ना यहाँ रुका ना वहां
शायद थक चुका है विनती कर.
अब चढ़ना चाहता है वह सूली,
जो है इसके खून की प्यासी
शायद यहीं आकर यह इस
दमनचक्र का शिकार हो जाएगा.
है रो रही इसकी बच्ची
जो अब अनाथ हो जाएगी
पर कोई बात नहीं
किसी दिन इसी भीड़ का
एक हिस्सा बन जाएगी.
बुझ गयीं हैं मशाल, बुझ गए हैं दीपक
न जाने इस हवा से और क्या बुझ जाएगा?
हैं उड़ गए छप्पर , हैं उजाड़ गयी बस्तियां
न जाने यह आंधी कितनों को लिलेगी ?
हैं बरस रहे अंगारे इन लाल आसमानों से
हैं झुलस रहे झोपड़े
हैं जल रहीं फसलें.
इस मंज़र का सच अब और लितना बताऊँ ?
इस अंगारे की तपिश को और कितना समझाउं ?
है इस सूरज की ताप जितना इसका बल
कहीं कोई और राही न जाए इसमें जल .
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4 comments:
superfaadu janab
@shiva : thanks brother....!!!
@dreamer.. LOVE IT..!! my fav. part..
बुझ गयीं हैं मशाल, बुझ गए हैं दीपक
न जाने इस हवा से और क्या बुझ जाएगा?
हैं उड़ गए छप्पर , हैं उजाड़ गयी बस्तियां
न जाने यह आंधी कितनों को लिलेगी ?
sheeesh... one of the bestest hindi works i've ever read.. more so cause hindi is a difficult language to write in..
*bows down* .. you rock.. \m/ :)
THANK UUUUUU.......!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!
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